Rajneeti Aur Media

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1970 के दशक में बिहार की राजनीति जेपी आंदोलन और आपातकाल सहित काफी उथल– पुथल वाली रही । पहली बार मार्च 1967 में महामाया प्रसाद सिन्हा के मुख्यमंत्रित्व काल में गैर कांग्रेसी जनक्रांति दल का शासन आया । इसके बाद जून 1969 में कांग्रेस के ही एक बड़े कांग्र..

1970 के दशक में बिहार की राजनीति जेपी आंदोलन और आपातकाल सहित काफी उथल– पुथल वाली रही । पहली बार मार्च 1967 में महामाया प्रसाद सिन्हा के मुख्यमंत्रित्व काल में गैर कांग्रेसी जनक्रांति दल का शासन आया । इसके बाद जून 1969 में कांग्रेस के ही एक बड़े कांग्रेस (ओ) का शासन रहा और भोला पासवान शास्त्री ने मुख्यमंत्री का पद संभाला । दिसंबर 1970 में सोशलिस्ट पार्टी के लिए कर्पूरी ठाकुर मुख्यमंत्री रहे और फिर जून 1977 में जनता पार्टी का शासन कर्पूरी ठाकुर और रामसुंदर दास के मुख्यमंत्रित्व काल में रहा । अपनी सीमित भूमिकाओं के बावजूद राज्य की मीडिया ने संतुलित रह कर सराहनीय प्रयास किया । अपने झुकावों के बावजूद पत्र–पत्रिकाओं ने सूचनाओं को छुपाया नहीं और लोगों तक खबरें पहुंचती रहीं । हालांकि कुछ ने जे पी आंदोलन के दौरान इसके समर्थन में बढ़–चढ़कर हिस्सा लिया लेकिन यह पक्षपात खबरों को गलत प्रस्तुत कर नहीं किया गया था, बल्कि यह उनके तेवर, उनके एप्रोच में एक झलक मात्र के तौर पर था । ऐसा ही आपातकाल के दौरान भी देखने को मिला । कई पत्र–पत्रिकाएं इस ओर से तटस्थता का भाव रखे हुए थीं । जैसे यह एक सामान्य प्रक्रिया हो! लेकिन इसके बावजूद पत्र–पत्रिकाओं ने खबरों के प्रवाह को रोका नहीं या किसी ने अनावश्यक विस्तार नहीं दिया ।

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