Laut Kr Aata Hai Zamana

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  • Product Code:Nayee Kitab Prakashan
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‘लौट कर आता है ज़माना’ गीतों और उसके आशय पर बात करती है, ख़ासकर कुछ शब्दों का अलग–अलग गीतों में प्रयोग और गीत किस कंटेक्स्ट में लिखे गए हैं को अच्छे से समझाती है–––! इसके साथ ही हर पन्ने पर ऐसे तथ्य हमारे सामने रखती है, जिन्हें जानकर कई बार हम चैंक जात..

‘लौट कर आता है ज़माना’ गीतों और उसके आशय पर बात करती है, ख़ासकर कुछ शब्दों का अलग–अलग गीतों में प्रयोग और गीत किस कंटेक्स्ट में लिखे गए हैं को अच्छे से समझाती है–––! इसके साथ ही हर पन्ने पर ऐसे तथ्य हमारे सामने रखती है, जिन्हें जानकर कई बार हम चैंक जाते हैं ।
यहाँ पुराने गीतों, गीतकारों, कुछ ख़ास शब्द और उनके गीतों में प्रयोग का ज़िक्र यूँ हुआ है, जैसे हम किसी अच्छे खाने में शामिल धनिए की चटनी या आम के अचार का ज़िक्र करते हैं ।
किताब में लेखक का गीत–संगीत और सिनेमा प्रेम तो दिखता है ही, जब वे परदे के पीछे घटित चीज़ों का ज़िक्र करते हैं तब समझ आता है कि रचना के पीछे का ‘बैकग्राउंड’ भी कितनी ज़रूरी और दिलचस्प चीज़ है ।
ये सब पढ़ते हुए मैं तो इतने सारे भूले–बिसरे क्लासिकल गीतों से गुज़रा हूँ कि अभी–अभी मैंने अपने ‘आइ–ट्यून’ की नई प्ले–लिस्ट बना ली है क्योंकि ये वो गीत हैं, जिन्हें शायद ही कोई एफ़एम चैनेल, यूट्यूब या म्यूज़िक स्टेशन चलाता हो । मैं चाहता हूं कि युवा पीढ़ी इस किताब को चाव से पढ़ें और हिंदी सिनेमा की कालजयी फिल्मों के बारे में जानें–समझें ।
–––संजीव के. झा
(जबरिया जोड़ी और बरोट हाउस फिल्म के स्क्रिप्ट राइटर)

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