Gurjari

₹280.00

₹350.00

rating
  • Ex Tax:₹280.00

रामविलास शर्मा का चिंतन फलक विश्वकोषीय है । शताधिक कृतियों के इस रचना संसार में अनुशासनों की विविधता तो है परंतु दृष्टिकोण में वह अत्यंत केन्द्रित एवं एकाग्र है । उसकी इस एकाग्रता का केन्द्रबिंदु है भारत एवं उसकी संस्कृति की बहुवचनीयता । राजनीतिक दर्..

रामविलास शर्मा का चिंतन फलक विश्वकोषीय है । शताधिक कृतियों के इस रचना संसार में अनुशासनों की विविधता तो है परंतु दृष्टिकोण में वह अत्यंत केन्द्रित एवं एकाग्र है । उसकी इस एकाग्रता का केन्द्रबिंदु है भारत एवं उसकी संस्कृति की बहुवचनीयता । राजनीतिक दर्शन के रुप में मार्क्सवादी सिद्धांतों के प्रति आस्थावान होते हुए भी वे कई बार उसका अतिक्रमण कर नई स्थापनाएं देते हैं । लोक संस्कृति के उदार मूल्यों के प्रति सहृदयता उन्हें सांस्कृतिक भौतिकवादी के रुप में स्थापित करती है । उनकी अनेक स्थापनाएं साहित्य, संस्कृति और इतिहास की समस्याओं पर नई रोशनी डालती हैं । विवादों और बहसों से उनका पुराना रिश्ता है । भारतीय परिप्रेक्ष्य में कई नवजागरणों की परिकल्पना, बहुजातीय राष्ट्रीयता और प्राक् आधुनिकता (अर्ली माडर्न) सम्बन्धी उनकी स्थापनाओं ने भारतीय एवं विश्व के राजनीतिक–सांस्कृतिक इतिहास को समझने के नए सूत्र दिए हैं । हिंदी जाति की संकल्पना एवं जाति के गठन सम्बन्धी चिंतन भी उनके उल्लेखनीय अवदानों में शामिल है । हिंदी जाति की आत्मचेतना के जागरण के लिए उन्होंने इस जाति के सांस्कृतिक इतिहास का वृहद आख्यान रचा । किसी भी जाति के सांस्कृतिक इतिहास के इतने विशद एवं बहुपक्षीय विवेचन का यह इकलौता दृष्टांत है । इस इतिहास में केवल हिंदी जाति की चर्चा ही नहीं है बल्कि तुलनात्मक रुप से भारत की अन्य जातियों एवं वैश्विक समुदायों की भी चर्चा है । दर्शन, इतिहास एवं साहित्य समीक्षा के अलावा उन्होंने भाषा पर विशद चिंतन किया है जिसका महत्व राष्ट्रीय एकता और भाषाई वैमनस्य के दूरीकरण की दृष्टि से असंदिग्ध है ।

Write a review

Note: HTML is not translated!
    Bad           Good