Jatiya Rashtriya Vimarsh Evam Ramvilash Sharma

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जाति की अवधारणा का विकास मूलत% माकर््सवादी सामाजिक विकास के इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है । स्टालिन ने जाति की परिभाषा के क्रम में उसके महत्वपूर्ण लक्षणों में सामान्य आवास भूमि, सामान्य संस्कृति, सामान्य भाषा तथा सामान्य ऐतिहासिक परम्परा को शामिल..

जाति की अवधारणा का विकास मूलत% माकर््सवादी सामाजिक विकास के इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है । स्टालिन ने जाति की परिभाषा के क्रम में उसके महत्वपूर्ण लक्षणों में सामान्य आवास भूमि, सामान्य संस्कृति, सामान्य भाषा तथा सामान्य ऐतिहासिक परम्परा को शामिल किया है । जातियाँ आधुनिक पूँजीवादी विकास की देन हैं । उपर्युक्त कारकों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, भाषा जो किसी जाति की आत्मिक संस्कृति और जातीय आत्मचेतना का सर्वाधिक जीवंत अभिलक्षण होती है । वह संस्कृति की प्रतिच्छाया और मानवीय चेतना का विधायक तत्व होने के कारण जाति की सांस्कृतिक पहचान का सूचक बन जाती है । प्रचार–प्रसार को लेते हैं । हिंदी का विकास हिंदी जाति के भविष्य और वर्तमान से जुड़ा मसला है । इसके लिए हिंदी जाति के सांस्कृतिक इतिहास की समझ होनी भी आवश्यक है । अपने विशाल लेखकीय अवदान में हिंदी जाति की सांस्कृतिक– ऐतिहासिक रूप रेखा प्रस्तुत कर वे हिंदी जाति के अस्तित्व और अस्मिता की एक मजबूत नींव रखते हैं । उनकी पूरी चिंता हिंदी जाति की अवधारणा को एक सामाजिक आंदोलन बनाने के केन्द्र के इर्द–गिर्द घूमती है । इस प्रक्रिया का विरोध सामंती और साम्राज्यवादी शक्तियाँ विभेद को बढ़ाकर और जनतांत्रिक चेतना को कमजोर करके करना चाहती हैं ।
इसी पुस्तक से

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