SAMAY SE SAMVAD: Hindi Cinema Ki Yatra (PB)

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  • Product Code:ISBN: 978-9381997406
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आज का हिन्दी सिनेमा किसी पहचान की मोहताज नहीं है । हालाँकि यह पहचान इसे किसी झटके में नहीं मिली । हाल के वर्षों में इसने साबित किया है कि वह सिर्फ मनोरंजन और रुपया बटोरने के लिए नहीं है बल्कि उसमें भारतीयता की पूरी झलक साफ दिखाई पड़ती है । किसे मालूम ..

आज का हिन्दी सिनेमा किसी पहचान की मोहताज नहीं है । हालाँकि यह पहचान इसे किसी झटके में नहीं मिली । हाल के वर्षों में इसने साबित किया है कि वह सिर्फ मनोरंजन और रुपया बटोरने के लिए नहीं है बल्कि उसमें भारतीयता की पूरी झलक साफ दिखाई पड़ती है । किसे मालूम था कि दादा साहेब फाल्के जिस सिनेमा का शुरुआत कर रहे हंै, वही सिनेमा एक दिन पूरी दुनिया में अपनी चमक बिखेरेगा । लेकिन इस यात्रा में इसे सौ साल से भी ज्यादा का समय लग गया । इन वर्षों में हिन्दी सिनेमा ने कई दौर देखा । शुरुआत के 17-18 वर्ष तो मूक सिनेमा का ही दौर रहा । फिर उसमें आवाज भरी गयी, फिर रंग । कभी स्वतन्त्रता आन्दोलन की गूँज सुनाई दी तो कभी देश विभाजन, आतंकवाद और युद्ध के भयावह दृश्य । कभी शहरी चकाचैंध तो कभी बीहड़ जंगल का सन्नाटा । ऐक्शन, भावुकता, यथार्थ और गीत-संगीत का मिला-जुला रूप है हिन्दी सिनेमा । दरअसल यह पुस्तक हिन्दी सिनेमा की इसी यात्रा का जीवन्त लेखा-जोखा है ।

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