Stri Samasya (PB)

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  • Product Code:ISBN: 978-9385450532
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स्वाधीनता आन्दोलन में स्त्रियों ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया, विभिन्न गतिविधियों में उन्होंने आशा से दस गुना अधिक उत्साह का परिचय दिया, आत्मत्याग, सामूहिक चेतना का स्त्री पक्ष देखना हो तो भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन की ओर देखना चाहिए । एनी बेसेंट ने तो यहाँ तक ..

स्वाधीनता आन्दोलन में स्त्रियों ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया, विभिन्न गतिविधियों में उन्होंने आशा से दस गुना अधिक उत्साह का परिचय दिया, आत्मत्याग, सामूहिक चेतना का स्त्री पक्ष देखना हो तो भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन की ओर देखना चाहिए । एनी बेसेंट ने तो यहाँ तक कहा कि होमरूल आन्दोलन में भारतीय स्त्रियों की भागीदारी उच्च श्रेणी की थी । उन्होंने घर-घर जाकर जन-चेतना जगाने का काम किया । भारतीय स्वाधीनता संग्राम का व्यापक प्रभाव स्त्री-आन्दोलन पर भी पड़ा । चाहे वह सत्याग्रह हो या शराब और विदेशी कपड़ों की दुकानों की पिकेटिंग या गाँधी का चरखा आह्वान-सब जगह स्त्रियों की भागीदारी काबिले तारीफ रही । इस तरह राष्ट्रीय आन्दोलन ने स्त्रियों को राजनीतिक क्रियाकलापों में शामिल होने का अवसर ही नहीं दिया बल्कि स्त्रीवाद के भविष्य की सुदृढ़ नींव भी रखी । इस दौर की एक खासियत यह भी रही कि औपनिवेशिक शक्तियों और उपनेवेषित समूह दोनों तरफ से ऐसी कई संस्थाएँ अस्तित्व में आयीं जो सामाजिक और राजनीतिक संघर्षों का प्रतिनिधित्व करती थीं । इन संस्थाओं ने सोची-समझी रणनीति के तहत सुधारों को जनता के बीच पहुँचाने के लिए छपे हुए शब्द को हथियार बनाया । इसी दौरान स्त्री धर्म, स्त्री दर्पण जैसी कुछ महत्वपूर्ण पत्रिकाएँ प्रकाशित हुर्इं । स्त्री धर्म पत्रिका, जिसे आगे चलकर कमला देवी चट्टोपाध्याय ने संभाला, की शुरुआत मार्गरेट कजिन्स नामक आयरिश सुफ्रागेट ने की थी जो 1915 में भारत आयीं थीं । इस पत्रिका को डा मुत्तुलक्ष्मी रेड्डी ने भी अपनी सम्पादकीय सेवाएँ दी थीं ।

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