Naatak | Play

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पिछले कुछ वर्षों से ऐसा संयोग रहा कि दलित मुद्दे मुझसे इस कदर टकराते रहे कि एक के बाद एक कई नाटक क्रम में लिख डाले । बीच-बीच में कुछ और सब्जेक्ट पर भी लिखा पर लोगों का ध्यान दलित सवाल पर ही अटका रहाए जिसके आधार पर मेरे बारे कहना शुरू कर दिया कि मैं अ..

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Sukhia Mar Gaya Bhookh Se (PB)

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सिनेमा से तो किसान गायब हो ही गया है, नाटक में भी यही हाल है । जिस तरह साहित्य का शहरीकरण हो रहा है, किसान लगातार हाशिये पर जा रहा है । कुछ अपवाद को छोड़ दे तो अभी भी इस ज्वंलत मुद्दे पर कोई उत्कृष्ट कविता, कहानी या नाटक नहीं लिखा गया है । यह जानने की..

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