Aalochna | आलोचना

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Adivasi Aur Hindi Upanyas

₹160.00

जब सरकार को लगा कि संप सभा के धूणी धाम जागृति का केन्द्र बनते जा रहे हैं और आदिवासियों के मध्य फैल रही जागृति का मतलब सिर्फ उनकी आंतरिक समस्याओं के प्रति जागरुकता तक सीमित न होकर राज के शोषण के खिलाफ चेतना फैलाने तक है तो उसने दमन की नीति अपना ली । ज..

Dekhate Parkhate Huye

₹160.00

चर्चित युवा कथाकार अभिषेक कश्यप के समीक्षा आलेखों की यह पुस्तक अपने पाठ में रचनात्मक साहित्य का सुख देती है । उलझाव भरे, अपठनीय, निरर्थकता की हद तक अबूझ अकादमिक किस्म की समालोचना से परे यह किताब समीक्षित पुस्तकों से एक सहज, सजग संवाद करती जान पड़ती है..

Dharmik Budhivada Kabir Se Shri Narayan ...

₹175.00

संपूर्ण विश्व में मानव समाज द्वारा कतिपय विशिष्ट नियमोपनियों का पालन किया जाता है । ऐसे सार्वभौमिक तथा सार्वजनिक नियमों अथवा सिद्धान्तों को जो समाज में किसी न किसी रूप में मान्य हो धर्म की संज्ञा दी जाती है । धर्म एक संस्था है जो मानव को सही रास्ते प..

Drashyantar

₹300.00

'दृश्यान्तर' नाटक, कला और सिनेमा के ज्वलंत प्रश्नों, समस्याओं तथा विचारणीय मुद्दों पर बहस करती पुस्तक है । प्रसिद्ध आलोचक डॉ- ज्योतिष जोशी ने इस पुस्तक में जहाँ साहित्य से नाटक का सम्बन्ध, हिन्दी रंगमंच की समकालीन चुनौतियाँ, पणिक्कर का रंग वैशिष्ट्य ..

Ghananand Ka Singar Kavy

₹275.00

कुछ पुस्तकें ऐसी होती हैं, जिनका दूसरा संस्करण नहीं होता । कारण है, पुस्तक के पाठक का अभाव । जो पुस्तक देश-विदेश के अतिविशिष्ट ग्रंथालयों, विश्वविद्यालयों और शो/ा संस्थानों में समादृत हो, उसका दूसरा संस्करण 41 वर्ष बाद हो रहा है, ऐसा क्यों ? हिन्दी व..

Hindi Navjagran Aur Stri Asmita

₹250.00

स्त्री लेखन के इतिहास की पड़ताल में नवजागरण कालीन हिन्दी की पत्रिकाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हैै । सरस्वती, मर्यादा, प्रभा और चांद, नवजागरण काल की नामचीन पत्रिकाएं हैं । इन पत्रिकाओं को स्त्री अस्मिता की दृष्टि से खंगालना, स्त्री रचनात्मकता को कवित..

Hindi Vigyapan Ka Pehla Daur

₹225.00

आरंभिक विज्ञापन सूचनात्मक मात्र होते थे, इनके कलेवर में परिवर्तन के पहले लक्षण उन्नीसवीं सदी की आखिरी दहाई में दिखाई देते हैं । यह ध्यान देनेवाली बात है कि इस दौर में कुछ ऐसी पत्रिकाएँ भी रहीं जिनमें विज्ञापन सिरे से नहीं छपे या कम छपे तो दूसरी ओर 'ह..

Itar

₹360.00

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Jainendra Kumar Ke Katha Sahitya Ka Mano...

₹400.00

जैनेन्द्र जैसे साहित्यकारों ने मनोवैज्ञानिक तत्त्वों के आधार पर मनोवृत्तियों की विवेचना कथा के माध्यम से की । पात्रों की मानसिकता मुख्य रूप से चर्चित की गयी । कथापात्रों के अन्तर्द्वंद्वअनावृत्त हुए । पात्रों के भावों के उत्थान और पतन को तथा उनकी मान..

Kalakar Ka Dekhana

₹100.00

आप जो रच रहे हैं, उसके लिए एकाग्रता जरूरी है । एकाग्रता नहीं तो आप रच ही नहीं सकते । रचनाकर्म ध्यान की ऐसी स्थिति है, ऐसा समय है, जिसमें आप अलौकिक महसूस करते हैं । आप 'स्वभाव' में स्थित होते हैं । और इसे आप ईश्वर या प्रकृति का नाम दे देते हैं क्योंकि..

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