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101 Shikshaprad Kahaniya (PB)

₹125.00

आज एक जमाना याद आता है । शाम को जब अंधेरा घिरने को होता, बच्चे अपना खेल समाप्त कर घर आते, घर आकर खाना खाते और फिर शुरू होता कहानी सुनने–सुनाने का सिलसिला । लगभग सभी बच्चे अपने नाना–नानी, दादा–दादी से कहानी सुनने की जिद करते और सच तो यह है कि कहानी सु..

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Aadha Ped Aadhe Hum (Hardcover)
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Aawaz Ke Station

Aawaz Ke Station

₹80.00

₹100.00

आवाज के स्टेशनवो पहला कागज़ मुझे आज तक नही मिलाजिस पर मैंने सबसे पहले कुछ लिखा थाना वो उम्र मिली, जिस उम्र में लिखा थाना वो हाथ मिले, जिन हाथों से लिखा थाअभी तक वो भाव, वो मनोदशा भी नही मिलीजिनमे वह लिखा गया होगाशायद वह कागज़ था ही नहीवह स्लेट या तख्ती..

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Air Strike @ Balakot

Air Strike @ Balakot

₹280.00

₹350.00

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Alka

Alka

₹280.00

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कविवर पण्डित रामरतनजी अवस्थी अनुभवसिद्ध रचनाकार हैं । साहित्य की अनेक विधाओं में उनका कार्य है । ‘अलका’ शीर्षक से उन्होंने मेघदूत का छायानुवाद किया है, वह भी गद्यगीत शैली में । इस छायानुवाद को पढ़ते हुए यदि हम अवस्थीजी द्वारा प्राक्कथन में उठाये गये क..

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Baat Bolegee

Baat Bolegee

₹280.00

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मनुष्य ने आग के साथ–साथ भाषा और संवाद के रास्ते भी खोजे । कोई समाज या समुदाय जब भी संकट में होता है, वह संवाद के नये आयामों की तलाश करता है । संवाद दरअसल संस्कृति और समाज के बीच एक पुल की तरह है, जहाँ द्विआयामी यात्रा की जा सकती है । कर्मेंदु शिशिर क..

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Bandi Jeevan

Bandi Jeevan

₹240.00

₹300.00

‘बनारस षड्यंत्र केस’ उत्तर भारत का प्रथम क्रांतिकारी प्रयास था जिसमें क्रांतिकारी शचीन्द्रनाथ सान्याल 26 जून 1915 को गिरफ्तार कर लिए गए और 14 फरवरी 1916 को आजीवन काला पानी की सजा के साथ ही उनकी सारी सम्पत्ति जब्त कर ली गई । कुछ समय उन्हें बनारस के का..

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Bazarvaad Aur Samkalin Kahani
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Bhartiya Natya Parampara Aur Aadhunikta

Bhartiya Natya Parampara Aur Aadhunikta

₹235.00

₹295.00

परम्परा, प्रयोग और शास्त्र का परस्पर सम्बन्ध क्या है और क्यों है ? और फिर सामयिक संदर्भों में उसकी प्रासंगिकता क्या है ?यह प्रश्न बड़ा स्वाभाविक और युक्तिसंगत है । विशेष रूप से 21वीं सदी के भारतीय युवा रंगकर्मियों के लिए तो यह प्रश्न सबसे अधिक महत्त्व..

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Bhikhari Thakur Aur Lokdharmita

Bhikhari Thakur Aur Lokdharmita

₹360.00

₹450.00

हिन्दू समाज के वास्तविक चित्र को सामने रखकर उन्होंने उसकी बड़ी आलोचना की, सुधार के प्रयत्न किये तथा अपनी भाषा में उपाय भी बतलाए । कहने का तात्पर्य है कि समाज के कदम में कदम मिलाकर चलना उनके लिए कठिन हो गया । अनमेल विवाह के कारण ही युवती विधवा बन जाती ..

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